what is option trading

What is option trading? | Derivatives Mrket | ऑप्शन मार्केट में ट्रेडिंग कैसे करते हैं?||

Option Trading- Derivative Market

डेरिवेटिव मार्केट के सेगमेंट में एक प्रकार Option Market का आता है, ऑप्शन मार्केट में 1 महीने से 3 महीने तक के कॉन्ट्रैक्ट बनाए जाते हैं और उन्हीं कॉन्ट्रैक्ट पर Option Trading की जाती है| ऑप्शन ट्रेडिंग के कॉन्ट्रैक्ट को छोटे से उदाहरण से समझते हैं-  मान लीजिए रमेश और मोहन दो मित्र है रमेश के पास कोई प्रॉपर्टी है जिसे वह ₹5,00,000  में बेचना चाहता है, मोहन प्रॉपर्टी खरीदना चाहता है इसलिए रमेश और मोहन के बीच में एक कॉन्ट्रैक्ट होता है जिसमें मोहन रमेश से कहता है कि मैं कुछ राशि पेशगी के तौर पर तुम्हें देता हूं और यह ₹5,00,000 की प्रॉपर्टी मैं खरीद लूंगा| यह कॉन्ट्रैक्ट 1 महीने के लिए होता है लेकिन हम 3 महीने का कॉन्ट्रैक्ट भी कर सकते हैं| अब अगर उस 1 महीने में प्रॉपर्टी के दाम ₹,500,000 से बढ़कर 7,00,000 रुपए हो जाते हैं तो इस स्थिति में रमेश को हानि होगी और मोहन ने क्योंकि कुछ पेशगी की राशि देकर प्रॉपर्टी लेने का कॉन्ट्रैक्ट कर लिया था इसलिए प्रॉपर्टी के रेट बढ़ने का मोहन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा| इस तरह से ऑप्शन मार्केट में कॉन्ट्रैक्ट बनाए जाते हैं आइए अब ऑप्शन मार्केट में ट्रेडिंग कैसे करते हैं यह समझते हैं-

जो शेयर Equity Market में खरीदे और बेचे जाते हैं उन्हीं में से कुछ शेयर डेरिवेटिव मार्केट में ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए रजिस्टर्ड होते हैं लेकिन यहां पर हम एक या दो शेयर नहीं खरीद सकते, ऑप्शन ट्रेडिंग में शेयर Lot size बनाए जाते हैं lot में संख्या कंपनी के अनुसार कितनी भी हो सकती है|

ऑप्शन मार्केट का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि यहां पर कॉन्ट्रैक्ट के बीच में हम बढ़ती हुई मार्केट में भी पैसा कमा सकते हैं और गिरती हुई मार्केट में भी पैसा कमा सकते हैं मान लीजिए किसी कंपनी का शेयर आज की तारीख में ₹1,000 का चल रहा है और हमें अपने एनालिसिस के माध्यम से लगता है कि आने वाले 1 महीने में इस शेयर का दाम 1,200 ₹ हो जाएगा तब इस स्थिति में हम उस कंपनी के शेयर के कुछ Lot खरीद लेते हैं लेकिन यहां पर समझने वाली बात है कि एक Lot में बहुत ज्यादा संख्या में शेयर होते हैं अगर उनकी गुणा आज के Market Price से की जाए तो यह Amount बहुत ज्यादा हो जाती है और इसी समस्या का फायदा हम ऑप्शन मार्केट में ले सकते हैं-  “जैसे एक Lot में 500 शेयर है और मार्केट प्राइस ₹ 1,000 चल रहा है तो दो Lot खरीदने पर (1,000*2)=10,00,000 रुपए का कॉन्ट्रैक्ट बनता है लेकिन हमें उन ₹10,00,000 का कुछ प्रतिशत ही प्रीमियम के तौर पर पेशगी के रूप में देना पड़ता है”  क्योंकि हमने उस शेयर में तेजी की संभावना देखकर माल खरीदा है तो हम ऑप्शन मार्केट में उस शेयर की CALL खरीदेंगे|

और यदि हमारे संभावनाओं के अनुसार आने वाले महीने में शेयर का दाम बढ़कर 1,200 ₹ हो जाता है तब, हमने शुरू में उस शेयर का जो प्रीमियम दिया था उसकी राशि भी बढ़ जाती है और प्रीमियम की बढ़ी हुई वह राशि ही हमारा प्रॉफिट कहलाती है- “जैसे मान लीजिए उस समय हमने 2 Lot यानी के (500*2)=1,000 शेयर खरीदे थे और उनका प्रीमियम ₹200 चल रहा था और जब शेयर की कीमत बढ़ी तो वह प्रीमियम भी बढ़कर ₹250 हो गया  है, अब इस स्थिति में बढ़ा हुआ ₹50 का प्रीमियम ही हमारा प्रॉफिट है [50*1,000share = ₹50,000] हमने ऑप्शन मार्केट के जरिए 10,00,000 रुपए के कॉन्ट्रैक्ट से ₹50,000 कमा लिए हैं| Option Trading गणना पर ही आधारित है अगर Option Trading की कैलकुलेशन को अच्छी तरह से समझ लिया जाए तो यहां पर कम समय में बहुत ज्यादा पैसा कमा सकते हैं जैसे ऊपर हमने बढ़ते हुए मार्केट का उदाहरण दिया है इसी प्रकार यदि हमारी संभावना किसी शेयर के प्रति आने वाले महीने में गिरने की है तब उस स्थिति में हम उस शेयर की PUT खरीद लेते हैं और अगर उस शेयर का दाम आने वाले महीने में गिर जाता है तब उसका प्रीमियम भी बढ़ जाता है और इसी प्रकार हम गिरते हुए मार्केट में भी PUT को बाय करके पैसा कमा सकते हैं| ऑप्शन मार्केट भी फ्यूचर मार्केट की तरह ही काम करता है लेकिन हम यहां पर Hedging करके दोनों तरह से पैसे कमा सकते हैं|

हमें आशा है कि आप को ‘ऑप्शन मार्केट किस तरह से काम करता है’ यह समझ आया होगा, अगर फिर भी आपके कुछ सवाल या सुझाव है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं|

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