Monetary Policy By RBI | मौद्रिक नीति अर्थव्यवस्था पर कैसे असर डालती है |

RBI Monetary Policy

क्या आपने कभी सोचा है?  कि, देश में महंगाई कैसे बढ़ती है दरअसल आप यह जानकर शायद चौक जाएं की महंगाई अपने आप नहीं बढ़ती है बल्कि इसे बढ़ाया जाता है…….,

जी हां! आरबीआई(RBI) रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा आर.बी.आई (RBI) के गवर्नर और उनके साथ कुछ मेंबर के माध्यम से आरबीआई की (Monetary Policy)मॉनेटरी पॉलिसी निर्धारित की जाती है और इसी Monetary Policy में यह निर्धारित किया जाता है कि देश में महंगाई की दर को कम किया जाना है या बढ़ाया जाना है आइए विस्तार से समझते हैं|

देश में बैंकों का सबसे बड़ा बैंक (Reserve Bank of India)रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया है, आरबीआई ही हमारे देश के सभी बैंकों को नियंत्रित करता है तथा इसके अलावा आरबीआई का मुख्य कार्य देश में महंगाई और रिसेशन को बैलेंस ने बनाए रखना है सामान्यतः जब हमारी मार्केट में पैसा बहुत ज्यादा हो जाता है तो महंगाई बढ़ जाती है और जब आरबीआई को लगता है कि देश में महंगाई की दर ज्यादा ही बढ़ती जा रही है तो आरबीआई Monetary Policy की बैठक का निर्धारण करता है Monetary Policy हर दो माह बाद होती है|

जैसा कि आपने ऊपर पढ़ा कि आरबीआई सभी बैंकों का केंद्रीय बैंक है इसलिए हमारे देश के जितने भी अन्य बैंक हैं उन सबको आरबीआई से लोन लेने की आवश्यकता पड़ती है लेकिन जब आरबीआई अन्य बैंकों को लोन देता है तो उनसे एक निर्धारित राशि पर ब्याज लगाता है उसे हम रेपो रेट कहते हैं उदाहरण से समझते हैं जैसे फिलहाल रेपो रेट 6.5% है और अन्य बैंकों ने आरबीआई से एक बड़ी राशि में लोन ले लिया है और इसी प्रकार बैंक भी आगे आम उपभोक्ताओं को लोन दे देते हैं इसी प्रक्रिया से मार्केट में पैसा आता है, जब लोगों के पास अधिक पैसा आता है तब लोग अपने उपभोग पर अधिक पैसे खर्च करते हैं जैसे खाने पीने की वस्तुओं में, उपयोग करने की वस्तुओं में वृद्धि गाड़ी खरीदना, घर खरीदना और अन्य| जब लोगों की उपभोग करने की क्षमता बढ़ जाती है तब मार्केट में वस्तुएं सीमित होने की वजह से सप्लाई कम हो जाती है और बाजार में लोगों के पास पैसे की संपूर्णता तथा वस्तुओं की सप्लाई में कमी होने के कारण बाजार में महंगाई बढ़ जाती है| अब इस महंगाई को कम करने के लिए आरबीआई अपनी Monetary Policy में रेपो रेट बढ़ा देता है जैसे पहले 6.5%(पर्सेंट) थी अब 7% पर्सेंट कर देगा इससे फर्क यह पड़ेगा कि अन्य बैंक जो आरबीआई से लोन लेकर रेपो रेट के द्वारा ब्याज देते हैं उन्हें अब ज्यादा ब्याज देना पड़ेगा इसलिए अन्य बैंक आरबीआई से अब कम पैसा उधार लेंगे और ठीक इसी प्रकार मार्केट में भी आम लोगों के लिए लोन की ब्याज की दर बढ़ जाती है जिससे मार्केट में पैसे की सप्लाई थोड़ी कम हो जाती है|

जैसे ही मार्केट में पैसा कम होता है लोग अपने उपभोग की अनावश्यक वस्तुओं को खरीदना कम कर देते हैं तथा मार्केट में कुछ समय के बाद वस्तुओं की सप्लाई फिर से सीमित हो जाती है और महंगाई की दर घट जाती है|

ठीक इसी प्रकार रिवर्स रेपो रेट भी होती है इसमें आरबीआई अन्य बैंकों का पैसा जमा करता है और बदले में बैंकों को रिवर्स रेपो रेट के जरिए ब्याज देता है जब मार्केट में पैसा ज्यादा होने की वजह से महंगाई बढ़ जाती है तब Monetary Policy में रेपो रेट बढ़ाकर जहां एक तरफ बैंक आरबीआई से कम लोन लेते हैं वहीं दूसरी तरफ रिजर्व रेपो रेट बढ़ाकर आरबीआई को यह फायदा होता है कि अन्य बैंक ज्यादा पैसा आरबीआई में जमा करते हैं जिससे बैंकों को ब्याज की राशि बढ़ी हुई कीमतों में मिलेगी|

दोस्तों यही आरबीआई का मुख्य कार्य होता है देश में महंगाई और रिसेशन के बीच बैलेंस बनाए रखना तथा बैंकों को लोन देना तथा उनका पैसा जमा करना| इन्हीं सब कारणों की वजह से देश में कभी महंगाई बढ़ जाती है और कभी घट जाती है लेकिन आम लोगों को यह बातें पता नहीं चल पाती| हमारा उद्देश्य यही रहता है कि हम साधारण भाषा में अपनी पोस्ट के जरिए आपको सही जानकारी प्रदान करें अगर आपका इस ब्लॉग-पोस्ट पर कोई विचार है तो आप हमें अपने विचार कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं|

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